प्रशांत सा पानी के ताल मैं
छोटी सी बूँद से उडती लेहर
स्थिरता से चलता जीवन मैं
छोटे से काँटे से उड़ता तूफ़ान
आंखोंमें नमी को बुलाके
तरंगोम्पे सेहेराती ज़िन्दगी
लेहेरोंको पकड़ने की चाहत
ज़िन्दगी के तूफ़ान मैं उड़ते
फूल समज कर चाहा तो
छुब्तें चाहत को काँटें बनकर
बुलाकर प्यार का रिश्ते को
तड़पाते हैं रुलाकर जिंदगी
इक पल मैं हसीं घुम जाए
छोटे से आहट के आने पे
रुलाने वाले इन कान्टोंकों
अनसुनी करने की हे चाहत
छुब्तें रिश्तें
Posted by Sudi Sunday, April 11, 2010 at 6:11 PM
Labels: Hindi
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