तनहा बैटेँ थे ... कुछ करने को था नही .. सोचा दिमाग गी घंटी थोडी बजा के...वक्त गुजारा जाए .
तनहा इस जिंदगी के सफर में
हजारो मिलते बिचड्ते राहोंको
समेटे समाया ना पाये हम अपने
दिल में वो बस यादों में रह गए
बहुत ही ख्वाब बनाये सफर चलते
बिन समजे कट गयी थी मंजिल
चाहकर रोक ना सके थे उनको
उड़ गयी खुशी की वो चन्द लम्हे
तेज हवा ने जिंदगी की रुत मोडा
देखते ही काली घटा आई सामने
आंसू के बून्दोंकी बारिश में पिगल
गुजर गयी घटाए तनहा छोड़ हमें
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