हम थे तनहा एक अरसे पहले
हुए थे दोस्त सारे प्यारे प्यारे
लगा था हम कही खो गए
आकर हमे घर से इस शहर
मिले थे कई नए लोग
बने थे कई प्यारे रिश्ते
लगने लगा था कही हम
आ न गए किसी जन्नत
हम थे मस्त अपनी ज़िंदगी मे
थे हम मस्ती से अपने यारों के संग
ज़िंदगी गुजर रही थी मौज के संग
करते थे दमाल गुमते इधर-उधर
ऐसी थी खुशिया थी मस्ती अपने यारोंके संग
इक झोंखा हवा का आया था एक दिन
बिकरने लगा ज़िंदगी की खुशियाँ मौज
हम यार होने लगे इधर-उधर उन झोंखों के संग
हमारे जन्नत सी ज़िंदगी मी आया था इक तूफ़ान
चलने लगी थी ज़िंदगी फिरसे अरसो पीछे
छाने लगी थी खामोशिया खुशियाँ चुपाके
लौटने लगी थी फ़िरसे जहाँ हुयी थी शुरुवात
.... ज़िंदगी
Posted by Sudi Tuesday, March 18, 2008 at 12:16 PM
Labels: Hindi
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