उस दिन की हे ये बात
बेटे थे हम उनके साथ
हम मरते थे उनपे
उनको नही थी इसकी खभर
इस तरह से गुजरा था वक्त
सुबह मिली थी शाम तक
ऐसे लम्हे मिलते थे कुछ
आज कल या अब के बीच
हम कुश थे इन लम्हों से
रहकर एक दूजे के साथ
ज़िंदगी थी इतनी हसीन
जब होता था उनका साथ
कुछ पल का उनका साथ
Posted by Sudi Wednesday, March 5, 2008 at 2:59 PM
Labels: Hindi
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4 comments:
March 8, 2008 at 9:50 AM
बहुत ही सुंदर कविता है। लिखते रहोये..
March 12, 2008 at 10:07 AM
waah dost , tu to SHAAYAR nikala .... lage rahio ...
March 18, 2008 at 1:59 PM
ತೇಜಸ್ವಿನಿ खुशी हुयी आपका comment देक कर...शुक्रिया..
March 18, 2008 at 2:00 PM
नरेन भाई.. बहुत दंयवाद :)
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