रूटे हुए दिल उनके बिना तरसे ... मिलना चाहे फ़िर भी मिलना पाये... अभ आप ही सम्जायिये कुछ इन हाल ऐ दिलोंको...
हमे नही थी ख़बर उनकी
थे बेखबर किसी जहाँ मे
कटते लम्हे ना थमा पाये
गुजरा था दिन शाम तले
मनमे था मिलन का संदेसा
रूटे थे उनकी अदावोम्पे
मिलते पर ना मानता दिल
मुश्किल से हुई मुलाकात
मिलन का था इंतज़ार
मन बेकरार एक नज़र का
पिगला रूटे दिल का गुस्सा
नज़र के सामने हमे पाकर
मेहमान बनी बिचड्ने की गडी
बिन बुलाई आई वों गडी
आँखे बनी थी नम सोचके
पर कुछ कहना पाये लबोंसे
चाहता उनका मन रहना संग
ज़बानी केह गए आन्खोंसे
लबोने दिया नही उनका साथ
फिरसे बिचडा खुशी का पल
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