संदेस के बारे में बातें कर रहा था उनसे ..मनमे ख़याल आया क्यों लिखा न जाए इस तरह मन की इक चोटी सी ए बात ..
करते रोज उनकी याद
आह बरते इस दिल की
राह तख्ती हर पल आँखे
आए छोटा सा एक संदेस
आँख खुलती आहट से
टूटकर सपनों से जगते
घंटी जो बजी थी पास
आया था प्यारा सा संदेस
मन में थी छुपी आशाएँ
सोचा उनका होगा पैगाम
छुपी प्यारी सी कोई बात
लेकर आया होगा संदेस
आँख से जलके वो मोती
थी इतनी खुशी की बात
इंतज़ार था इस पल का
आख़िर आया इक संदेस
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