ऐँसे ही बेँटे थे हम कहीं मन ने किया इशारा कोई | याद् भी आती थी कोई पर जानना पाये वो हे कोई . . .आगे पडिये क्या हाल हो गई दिल की बतादो मुझे वो हे कोई |
हे इस् दिल के पास कोई
आती हे उनकी याद हर् घड़ी
डून्ड्तेँ हैं हर वक़्त उन्हें
दिल न समज पाये वो हे कोई |
कटती हर् पल देख कर घड़ी
राह तकते हम पलोंको लपेटे
हवा के झोंखोंका एह्सास् को
समज न पाये दिल वो हे कोई |
लाती हे खुशी कुछ पल तो
बेचैन कर देती हे कुछ पल
लगता सामने आगई हे कोई
पर देखना पाते हैं वो हे कोई |
सन्नाटा सा छा जाता हे कभी
कभी साँसों को थाम लेता हे कोई
आँख थमते ही जगते ख़्वाब से
मिल नही पाते सान्सोंसे वो हे कोई |
1 comments:
April 24, 2008 at 3:01 PM
Hi , its very cool poem . Nice work man . Keep writing always ....
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